दीपावली के पाँच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धनत्रयोदशी भी कहते हैं। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। इसके बाद 7 नवंबर को छोटी दिवाली, 8 नवंबर को दीपावली, 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज होगी।

इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई शुभ वस्तु घर में सुख-समृद्धि लाती है, लेकिन कुछ चीज़ें इस दिन खरीदना अशुभ भी माना जाता है। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें। इस दिन माँ लक्ष्मी, कुबेर, भगवान धनवंतरि और यमराज की उपासना की जाती है।

धनतेरस 2026 पर धनवंतरि की पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का अंश और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

हमारी संस्कृति में "पहला सुख निरोगी काया" माना गया है। धन कमाने के लिए भी स्वस्थ शरीर चाहिए। पूजा में धनवंतरि जी के चित्र के सामने दीप जलाएँ, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र जपें: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः"।

रीति-रिवाज और परंपराएँ

1. खरीदारी की परंपरा: इस दिन नई वस्तु खरीदकर घर लाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी वस्तु में समृद्धि की वृद्धि होती है।

2. घर की सफाई और सजावट: धनतेरस से पहले पूरे घर की सफाई की जाती है। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ घर में ही प्रवेश करती हैं। द्वार पर रंगोली और तोरण सजाया जाता है।

3. यमदीपदान: शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आटे का चौमुखा दीपक जलाया जाता है। यह अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए किया जाता है।

4. लक्ष्मी-कुबेर पूजन: प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर देव की पूजा होती है। व्यापारी वर्ग अपनी तिजोरी और बही-खातों की पूजा भी करता है।

5. धनिया और गुड़ का प्रसाद: कई क्षेत्रों में साबुत धनिया और गुड़ का भोग लगाया जाता है। बाद में धनिया के बीज गमले या बाग में बोए जाते हैं।

धनतेरस 2026 पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें

धनतेरस 2026 पर क्या खरीदें

1. सोना और चाँदी: सोने के सिक्के या आभूषण समृद्धि का प्रतीक हैं। बजट कम हो तो चाँदी का सिक्का या छोटी चाँदी की वस्तु खरीद सकते हैं। लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्का विशेष शुभ माना जाता है।

2. पीतल और तांबे के बर्तन: भगवान धनवंतरि के हाथ में कलश था, इसलिए बर्तन खरीदना परंपरा है। नया कलश, लोटा या कोई भी पीतल या तांबे का बर्तन ले सकते हैं।

3. नई झाड़ू: झाड़ू को माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। नई झाड़ू खरीदना घर से दरिद्रता दूर करने का संकेत है।

4. साबुत धनिया के बीज: इन्हें पूजा में अर्पित करें और बाद में बो दें। यह धन-वृद्धि का प्रतीक है।

5. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति: दीपावली पूजन के लिए मिट्टी या धातु की नई मूर्ति इसी दिन लाना शुभ है।

6. गोमती चक्र, कौड़ी और श्रीयंत्र: इन्हें पूजा में रखकर तिजोरी में रखने की मान्यता है।

7. नया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या घर: यदि आपने पहले से योजना बनाई है, तो इस दिन खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन यह तभी करें जब बजट अनुमति दे।

8. दीपक और पूजा सामग्री: मिट्टी के दीये, कपूर, रोली और कलावा खरीदें। इससे कारीगरों को भी रोज़गार मिलता है।

धनतेरस 2026 पर क्या न खरीदें

1. लोहे और स्टील की वस्तुएँ: लोहे को शनि से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन इसे खरीदना अशुभ माना जाता है। स्टील के बर्तनों से भी कई लोग परहेज़ करते हैं।

2. काले रंग की वस्तुएँ: काले कपड़े, काले जूते या काला सामान शुभ नहीं माना जाता। लाल, पीला या सुनहरा रंग चुनें।

3. नुकीली चीज़ें: चाकू, कैंची, सुई जैसी वस्तुएँ खरीदना वर्जित माना जाता है।

4. काँच और प्लास्टिक का सामान: कई मान्यताओं में इन्हें राहु से जोड़ा जाता है और इस दिन खरीदना अच्छा नहीं माना जाता।

5. खाली या अधूरे बर्तन: बर्तन खरीदकर उसे खाली घर न लाएँ। उसमें थोड़ा चावल, मिठाई या पानी भरकर लाएँ।

6. कर्ज़ लेकर खरीदारी: दिखावे के लिए उधार लेकर कुछ भी न खरीदें। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही खर्च करें।

7. नकली या मिलावटी सामान: सोना-चाँदी हमेशा हॉलमार्क वाला खरीदें और पक्का बिल लें।

धनतेरस पर घर में बरकत लाएंगे ये आसान वास्तु टिप्स

  • पूजा की सही दिशा: धनतेरस की पूजा करते समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें। पूजा करते वक्त आपका अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।

  • तिजोरी की जगह (कुबेर स्थान): वास्तु के हिसाब से उत्तर दिशा कुबेर जी की मानी जाती है। इसलिए पैसे, गहने या तिजोरी हमेशा घर के उत्तर में ही रखें।

  • कैसा हो मेन गेट? त्योहार पर आपके घर का मुख्य दरवाज़ा बिल्कुल साफ और रोशनी से जगमगाता हुआ होना चाहिए। वहां आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं और स्वस्तिक ज़रूर बनाएं।

  • दीये कहाँ जलाएं? शाम के वक्त घर के मेन गेट, आंगन में तुलसी के पौधे और घर के सभी कोनों में दीये जलाकर रोशनी करें।

  • नई चीज़ों को कहाँ रखें? बाज़ार से खरीदकर लाया गया सोना-चांदी पूजा के बाद अपनी तिजोरी में रख दें। अगर आपने बर्तन खरीदे हैं, तो उन्हें अपनी रसोई या पूजा घर में जगह दें।

  • कबाड़ बाहर निकालें: घर में अगर कोई बंद घड़ी, टूटा हुआ शीशा या फालतू का कबाड़ पड़ा है, तो उसे धनतेरस से पहले ही घर से बाहर कर दें।

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निष्कर्ष 

आखिर में बस यही कहूंगा कि धनतेरस का मतलब सिर्फ महंगी चीज़ें या सोना-चांदी खरीदना नहीं है। यह त्योहार असल में अच्छी सेहत, सुख-शांति और पॉजिटिविटी का प्रतीक है। इसलिए खरीदारी हमेशा अपने बजट को देखकर और पूरी श्रद्धा के साथ करें। अगर आप सोना नहीं ले पा रहे हैं, तो बिल्कुल निराश न हों, एक नई झाड़ू, थोड़ा सा साबुत धनिया या कुछ मिट्टी के दीये घर लाकर भी आप इस त्योहार की पूरी बरकत पा सकते हैं।