दिवाली 2026 जैसे-जैसे करीब आएगी, वैसे-वैसे घर का माहौल ही पूरी तरह बदलने लगेगा। एक तरफ हर कोने को चमकाने की होड़ मची होती है, तो दूसरी तरफ बाजार से लाइट्स, दीये और मिठाइयां लाने का अलग ही क्रेज होता है। जब शाम ढलते ही घर दीयों की रोशनी से नहा उठता है, तो सच में पूरा घर खुशियों से भर जाता है।
देखा जाए तो दिवाली सिर्फ दीये जलाने का दिन नहीं है। ये तो वो मौका है जब हम अपनों के साथ बैठते हैं, पुरानी नाराजगी भूलते हैं और जिंदगी को एक नई शुरुआत देते हैं। इसके साथ ही, घर में बरकत और सुख-शांति के लिए भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा तो हमारी सबसे प्यारी परंपराओं में से एक है।
दिवाली 2026 कब है?
इस बार, 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार के दिन पड़ रही है। हर बार की तरह कार्तिक अमावस्या की इस खास रात को ही लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाएगी।
दिवाली की तैयारियां हालांकि कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। लोग घर की सफाई करते हैं, पुराने सामान को व्यवस्थित करते हैं, पूजा की सामग्री खरीदते हैं और घर को दीपों व रंगोली से सजाते हैं।
दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
लक्ष्मी पूजा का बेस्ट टाइम: शाम 5:55 से 7:51 बजे तक (करीब 1 घंटा 56 मिनट)
प्रदोष काल: शाम 5:32 से रात 8:10 तक
वृषभ काल: शाम 5:55 से 7:51 तक
नोट: नई दिल्ली और आस-पास के इलाकों के लिए भी यही समय रहेगा, बाकी शहरों में पंचांग के हिसाब से कुछ मिनटों का फर्क हो सकता है।
लक्ष्मी पूजा का क्या महत्व है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसी वजह से दिवाली की रात दोनों की पूजा साथ करने की परंपरा है।
बहुत से परिवारों में लक्ष्मी पूजा केवल धन की कामना तक सीमित नहीं रहती। लोग अपने परिवार की सुख-शांति, अच्छी सेहत, कारोबार में उन्नति और आने वाले वर्ष के लिए मंगलकामना भी करते हैं। अगर आप भी इस दिवाली सुख समृद्धि चाहते हैं तो आप एस्ट्रो अरुण पंडित द्वारा की जाने वाली खास दिवाली पूजा का हिस्सा बन सकते हैं।
दिवाली से पहले घर की सफाई करने की परंपरा को भी इसी भावना से जोड़ा जाता है। साफ-सुथरा घर त्योहार की तैयारी के साथ मन में भी एक नई शुरुआत का भाव पैदा करता है।
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?
लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे पहले पूजा वाले स्थान को साफ करें। वहां चौकी रखकर साफ कपड़ा बिछाएं और मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जा सकती है। इसके बाद मां लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम और मिठाई अर्पित करें। पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार लक्ष्मी जी तथा गणेश जी की आरती करें।
पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्यों का साथ बैठना इस अवसर को और खास बना देता है।
दिवाली से जुड़ी कहानी
दिवाली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में भगवान राम के अयोध्या लौटने की कहानी प्रमुख है। मान्यता है कि जब भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे, तब पूरे नगर में खुशी की लहर दौड़ गई थी।
कहा जाता है कि भगवान राम के स्वागत के लिए अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और गलियों को साफ किया और जगह-जगह दीप जलाए। अंधेरी रात में जलते हुए असंख्य दीपकों से पूरी अयोध्या रोशनी से जगमगा उठी थी। लोगों ने अपने प्रिय राजा के लौटने की खुशी में उनका स्वागत किया और इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया।
इसी कथा को दिवाली के प्रकाश से भी जोड़ा जाता है। दीपक यहां केवल घर को रोशन करने का माध्यम नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाते हैं।
दिवाली 2026 पर एस्ट्रो अरुण पंडित जी का खास तोहफा
दिवाली के आसपास कई लोग अपने आने वाले वर्ष को लेकर सोचते हैं। करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन से जुड़े सवाल इस समय मन में आना स्वाभाविक है।
एस्ट्रो अरुण पंडित जी की गाइडेंस में व्यक्ति की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर व्यक्तिगत कुंडली बनाई जाती है। व्यक्तिगत कुंडली बनवाने के लिए आप हमारी वेबसाइट एस्ट्रो अरुण पंडित से आर्डर कर सकते हैं। इसमें आपके ग्रहों की स्तिथि के साथ आपको रत्नों की सलाह और मंत्र पूजन के बारे में भी बताया जाता है। दिवाली के समय कई लोग नया रत्न या आभूषण खरीदना शुभ मानते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में अलग-अलग रत्नों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से बताया गया है। अगर आप भी अपनी कुंडली के मुताबिक रत्न मंगवाना चाहते हैं तो आप जेम्समंत्रा पर विजिट कर सकते हैं।
लेकिन अगर आपको अपनी कुंडली से जुडी या किसी रत्न, पूजा और मन्त्रों से जुडी सलाह चाहिए तो आप हमारे होरोकोस्मो ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। जहाँ पर पहली बार जुड़ने वाले लोगों के लिए निःशुल्क आचार्य परामर्श का विकल्प भी उपलब्ध है।
दिवाली 2026 पर क्या करें?
दिवाली के दिन घर को साफ और व्यवस्थित रखें। पूजा स्थल को तैयार करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें।
शाम को शुभ मुहूर्त में दीप जलाएं और परिवार के साथ पूजा करें। इस दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, बड़ों का आशीर्वाद लेना और परिवार के साथ खुशियां बांटना भी त्योहार को और अर्थपूर्ण बना सकता है।
निष्कर्ष
दिवाली की असली खूबसूरती घर की सजावट और दीपों के साथ-साथ परिवार के साथ बिताए गए समय में भी है। यह त्योहार हमें प्रकाश, सकारात्मकता और नई शुरुआत की याद दिलाता है।
आने वाली दिवाली आपके और आपके परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए, इसी शुभकामना के साथ आप सभी को दिवाली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।
दिवाली 2026 का पांच दिवसीय कैलेंडर
दिन | त्योहार | तारीख |
|---|---|---|
पहला दिन | धनतेरस | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार |
दूसरा दिन | छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी | 7 नवंबर 2026, शनिवार |
तीसरा दिन | मुख्य दिवाली / लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर 2026, रविवार |
चौथा दिन | गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर 2026, मंगलवार |
पांचवां दिन | भाई दूज | 11 नवंबर 2026, बुधवार |