गणेश चतुर्थी 2026

गणपति बप्पा मोरया! यह सिर्फ एक जयकारा नहीं, बल्कि उस खुशी की आवाज है जो गणेश चतुर्थी के दिनों में हर तरफ सुनाई देती है। कहीं घर में बप्पा के स्वागत की तैयारी होती है, तो कहीं पंडाल सजने लगते हैं। कहीं मोदक बनते हैं, तो कहीं आरती की गूंज पूरे माहौल को भक्तिमय बना देती है।

गणेश चतुर्थी 2026 भी इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान गणेश को अपने घर और पंडालों में विराजमान करते हैं और उनकी पूजा, आरती और भोग के साथ स्वागत करते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, सफलता और नई शुरुआत का देवता माना जाता है। इसलिए किसी नए काम की शुरुआत से पहले भी उनको याद किया जाता है।

लेकिन इस पर्व की खूबसूरती सिर्फ बप्पा के आगमन तक सीमित नहीं है। कुछ दिनों बाद वही भक्त उन्हें पूरे प्रेम और भावुक मन से विदाई देते हैं। तो आखिर गणपति विसर्जन क्यों किया जाता है और बप्पा को विदा करने के पीछे क्या भाव छिपा है? आइए, गणेश चतुर्थी 2026 की तारीख से लेकर पूजा, परंपराओं और विसर्जन तक इस पूरे पर्व को समझते हैं।

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

गणेश चतुर्थी हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी चौथे दिन मनाई जाती है। यह पर्व आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में आता है।
  • गणेश चतुर्थी 2026: सोमवार, 14 सितंबर, 2026
  • शुभ मुहूर्त: 11:02 AM से 01:31 PM
  • अवधि: 02 घंटा, 28 मिनट
  • वर्जित चंद्रदर्शन का समय: सुबह 09:06 बजे से रात 08:04 बजे तक


  • गणेश चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 14 सितंबर, 2026 को 07:06 AM
  • गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, 2026 को 07:44 AM
  • गणेश विसर्जन: शुक्रवार, 25 सितंबर, 2026


गणेश चतुर्थी 2026: अलग-अलग शहरों का मुहूर्त:
  • मुंबई: 11:20 AM से 01:48 PM
  • पुणे: 11:16 AM से 01:44 PM
  • नई दिल्ली: 11:02 AM से 01:31 PM
  • नोएडा: 11:02 AM से 01:30 PM
  • अहमदाबाद: 11:21 AM से 01:49 PM
  • बेंगलुरु: 11:02 AM से 01:28 PM

गणेश चतुर्थी क्या है?

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, सफलता और नई शुरुआत के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ या महत्वपूर्ण काम की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता, यानी सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता, माना जाता है।

गणेश चतुर्थी भारत के कई हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। खासतौर पर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में इस पर्व की खास धूम देखने को मिलती है। महाराष्ट्र में बड़े-बड़े गणेश पंडाल और भव्य आयोजन इस त्योहार को और खास बना देते हैं।

इन दिनों घरों, मंदिरों और सार्वजनिक जगहों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। भक्त भगवान गणेश की पूजा और आरती करते हैं, उन्हें पारंपरिक मिठाइयों का भोग लगाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ मिलकर इस पर्व को खुशी और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चोरी करने और एक व्यक्ति की हत्या करने का झूठा आरोप लगा। श्रीकृष्ण ने देवर्षि नारद की सलाह पर गणेश चतुर्थी का व्रत किया और स्यमन्तक मणि की पूरी सच्चाई सामने आ गई।

बाद में नारद जी ने श्रीकृष्ण को बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने के कारण उन पर यह झूठा आरोप लगा था। मान्यता है कि भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था कि इस दिन चंद्रमा को देखने वाले व्यक्ति पर झूठा कलंक लग सकता है।

इसी वजह से गणेश चतुर्थी के दिन व्रत और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

गणेश चतुर्थी की पूजा कैसे की जाती है?

बप्पा को घर बुलाने के बाद उनकी पूजा कैसे करें? गणेश चतुर्थी की पूजा बहुत सरल तरीके से श्रद्धापूर्वक की जा सकती है।

  • सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करके गणपति जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • गणेश जी को जल, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
  • उन्हें मोदक या मिठाई, फल और अन्य भोग चढ़ाएं।
  • दीपक जलाकर और धूप जलाकर गणेश जी की पूजा करें।
  • गणेश जी के मंत्र का जाप करें और गणेश जी की आरती करें।
  • अंत में सभी परिवार के सदस्यों के साथ गणपति बप्पा से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

गणपति बप्पा आते हैं खुशियां लेकर, फिर उन्हें विदाई क्यों दी जाती है?

गणेश चतुर्थी पर भक्त पूरे श्रद्धा और प्रेम से गणपति बप्पा को अपने घर या पंडाल में आमंत्रित करते हैं। कुछ दिनों तक उनकी पूजा और सेवा करने के बाद गणपति विसर्जन किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि बप्पा अपने भक्तों के दुख और परेशानियां अपने साथ ले जाते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर विदा होते हैं। उनका विसर्जन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हर शुरुआत के बाद एक विदाई होती है और हर विदाई के साथ एक नई शुरुआत का संदेश छिपा होता है।