दीवाली की जगमगाहट के ठीक अगले दिन बारी आती है 'गोवर्धन पूजा' की, जिसे हम प्यार से 'अन्नकूट' भी कहते हैं। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण, हमारी प्रकृति और गौ-माता को दिल से 'धन्यवाद' कहने का एक बेहद खूबसूरत तरीका है। इस दिन घरों में गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी खास पूजा होती है और मंदिरों में तो अन्नकूट के छप्पन भोग का प्रसाद बंटता है, जिसका स्वाद ही एकदम अलग होता है!
तो चलिए, जानते हैं कि साल 2026 में गोवर्धन पूजा की पक्की तारीख क्या है, इसका सबसे शुभ मुहूर्त कब रहेगा और पूजा की एकदम आसान विधि क्या है।
गोवर्धन पूजा 2026: तारीख और मुहूर्त
विवरण | जानकारी |
पर्व का नाम | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट / बलि प्रतिपदा |
तारीख | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
तिथि | कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा |
दीपावली (लक्ष्मी पूजा) | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
भाई दूज | बुधवार, 11 नवंबर 2026 |
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ | 9 नवंबर, दोपहर लगभग 12:30 बजे |
प्रतिपदा तिथि समाप्त | 10 नवंबर, दोपहर लगभग 2:00 बजे |
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त | सुबह लगभग 6:40 से 8:50 बजे (दिल्ली) |
ज़रूरी सूचना: अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग या मंदिर से ज़रूर जाँच लें।
गोवर्धन पूजा का महत्व
प्रकृति, पर्वत और पर्यावरण के प्रति आभार का संदेश।
गौ-माता की सेवा और पूजा का विशेष दिन।
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से अन्न-धन की वृद्धि की मान्यता।
अहंकार छोड़कर विनम्र रहने की सीख।
महाराष्ट्र में बलि प्रतिपदा और गुजरात में नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है।
पूजा सामग्री
गाय का गोबर (गोवर्धन बनाने के लिए)
श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र
अन्नकूट के लिए चावल, कढ़ी, सब्ज़ियाँ और मिठाइयाँ
फूल, माला और तुलसी दल
रोली, चावल (अक्षत), धूप और दीपक
जल, दूध, दही और शहद
खील-बताशे और गन्ना
गोवर्धन पूजा की विधि
सुबह जल्दी स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें।
आँगन या पूजा स्थान में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ, अक्सर लेटे हुए पुरुष के रूप में।
उसे फूल, घास और छोटे दीपकों से सजाएँ। नाभि के स्थान पर दीया रखें।
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपना नाम, गोत्र और तिथि बोलते हुए संकल्प लें।
रोली, चावल, फूल और धूप से गोवर्धन की पूजा करें और श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
गौ-माता को स्नान कराकर तिलक लगाएँ, माला पहनाएँ और भोजन खिलाएँ।
अन्नकूट का भोग लगाएँ। चावल, सब्ज़ी, कढ़ी और मिठाई का पहाड़नुमा ढेर बनाकर श्रीकृष्ण को अर्पित करें।
आरती करें और गोवर्धन की सात परिक्रमा करें।
प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।
अन्नकूट का भोग: क्या बनाएँ?
कढ़ी-चावल और पूरी
मिक्स सब्ज़ी (हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ सहित)
बेसन और गेहूँ से बने पकवान
खीर, हलवा और अन्य मिठाइयाँ
कई मंदिरों में 56 प्रकार के भोग (छप्पन भोग) की परंपरा
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
द्वापर युग में वृंदावन और ब्रज के लोग हर वर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे, ताकि समय पर वर्षा हो और फसलें अच्छी हों। बालक श्रीकृष्ण ने देखा कि सब लोग डर और परंपरा के कारण इंद्र को प्रसन्न करने में लगे हैं। उन्होंने नंद बाबा और ग्रामवासियों को समझाया कि हमें अन्न, जल और चारा तो गोवर्धन पर्वत और प्रकृति से मिलता है, इसलिए असली पूजा के योग्य वही है। ग्रामवासियों ने कृष्ण की बात मानी और इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की और अन्नकूट का भोग लगाया।
यह देखकर इंद्र को अपने अपमान का क्रोध आया और उन्होंने ब्रज पर मूसलाधार वर्षा शुरू करा दी। चारों ओर बाढ़ जैसे हालात बन गए, गाएँ और ग्वाले घबरा उठे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा (छोटी) उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासियों, गायों और पशुओं को उसके नीचे शरण दी। सात दिनों तक वर्षा होती रही, पर कोई भी कष्ट में नहीं आया।
अंत में इंद्र का अहंकार टूट गया। उन्होंने श्रीकृष्ण की महिमा पहचानी, क्षमा माँगी और उनकी स्तुति की। तभी से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा चली आ रही है। यह कथा सिखाती है कि भक्ति, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और विनम्रता अहंकार से कहीं बड़ी है।
ज्योतिष दृष्टि से गोवर्धन पूजा 2026 का महत्व
गोवर्धन पूजा केवल अन्नकूट और श्रीकृष्ण की लीला का पर्व नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, जो साहस, ऊर्जा, पराक्रम और रक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि अमावस्या के बाद चंद्रमा के बढ़ने की शुरुआत मानी जाती है, जो नई शुरुआत, सकारात्मकता और मानसिक संतुलन का संकेत देती है। ऐसे में मंगल की शक्ति और चंद्रमा की शुभता का यह मेल आत्मविश्वास, सुरक्षा और नए संकल्पों के लिए अनुकूल माना जा सकता है। यही कारण है कि इस दिन अहंकार छोड़कर कृतज्ञता, सेवा और नई शुरुआत का भाव अपनाने की परंपरा है।
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निष्कर्ष
गोवर्धन पूजा हमें याद दिलाती है कि प्रकृति ही हमारी असली पालनहार है। 10 नवंबर 2026 को शुभ मुहूर्त में गोवर्धन और गौ-माता की पूजा कीजिए, अन्नकूट का भोग लगाइए और परिवार के साथ खुशियाँ बाँटिए।
आप सभी को गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ!