करवा चौथ का नाम सुनते ही सबसे पहले बाज़ारों की वो अनोखी चहल-पहल याद आती है। मेहंदी की महक, लाल चूड़ियाँ और सजी-धजी पूजा की थालियाँ खुद ही बता देती हैं कि कार्तिक का महीना शुरू हो गया है। सच कहें तो, यह सिर्फ दिन भर का एक निर्जला व्रत नहीं है, यह तो पति-पत्नी के बीच के अटूट भरोसे, प्यार और साथ निभाने के वादे का एक बेहद खूबसूरत जश्न है। 

अगर आप भी इस बार यह व्रत रख रही हैं और सही तारीख या मुहूर्त को लेकर थोड़ी कन्फ्यूज़ हैं, तो बिल्कुल फिक्र मत कीजिए। इस ब्लॉग में हमने बहुत ही आसान तरीके से बताया है कि इस साल करवा चौथ का दिन कौन सा है, पूजा का सबसे शुभ समय क्या रहेगा और व्रत रखने के सही नियम क्या हैं। 

करवा चौथ 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भारत में इस वर्ष करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। 

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: दिल्ली के लिए शाम लगभग 5:38 बजे से 6:57 बजे तक। 

  • चंद्रोदय का समय: दिल्ली में लगभग रात 8:18 बजे। 

चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। शहर के हिसाब से इसमें 15 से 45 मिनट तक का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर का सही समय पहले से देख लें। कुछ पंचांगों में तिथि और समय में थोड़ा अंतर मिलता है। अपने स्थानीय पंडित या पंचांग से एक बार पुष्टि कर लेना अच्छा रहता है। 

करवा चौथ का महत्व

इस दिन सुहागिन महिलाएँ सूर्योदय से पहले से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से पति की लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है।

इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा होती है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए महिलाएँ उनसे अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना करती हैं। "करवा" मिट्टी के उस छोटे घड़े को कहते हैं जिसमें जल भरकर पूजा की जाती है, और "चौथ" का मतलब चतुर्थी तिथि है।

धार्मिक पक्ष के अलावा यह पर्व रिश्तों को मज़बूत करने का भी मौका है। पूरे दिन का उपवास, सजना-संवरना और शाम को सब एक साथ पूजा करना परिवार और पड़ोस को जोड़ता है। अगर आप भी अपने पार्टनर के साथ कुंडली मिलान रिपोर्ट बनवाना चाहते हैं तो आप एस्ट्रो अरुण पंडित पर विजिट कर सकते हैं। 

करवा चौथ की पौराणिक कथा

सबसे प्रचलित कथा रानी वीरवती की है। वीरवती सात भाइयों की इकलौती और लाड़ली बहन थी। विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वह मायके आई और उसने निर्जला व्रत रखा। शाम होते-होते भूख-प्यास से उसकी हालत बिगड़ने लगी।

भाई बहन की यह दशा देख न सके। उन्होंने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की ओट से उसकी रोशनी दिखाई और कहा कि चाँद निकल आया है। वीरवती ने उसे चाँद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया। जैसे ही उसने पहला निवाला लिया, उसे पति की बीमारी का समाचार मिला।

ससुराल पहुँचने पर उसने पति को मृत पाया। वह फूट-फूटकर रोई और माता पार्वती का स्मरण करने लगी। माता प्रकट हुईं और बताया कि व्रत अधूरा टूटने के कारण यह हुआ है। उन्होंने उसे पूरे नियम से व्रत करने को कहा। वीरवती ने अगले वर्ष पूरी श्रद्धा से करवा चौथ का व्रत रखा और उसके पति को जीवनदान मिल गया। तभी से यह व्रत श्रद्धा और संयम के साथ रखा जाता है।

सरगी: व्रत की शुरुआत

व्रत की शुरुआत सरगी से होती है। परंपरा के अनुसार सास अपनी बहू के लिए सुबह सूर्योदय से पहले सरगी भेजती है। इसमें फल, मेवे, मिठाई, फेनी, नारियल पानी और सुहाग का सामान होता है। इसे सूर्योदय से पहले खाया जाता है ताकि दिनभर के उपवास के लिए ऊर्जा बनी रहे। सरगी में सास-बहू के स्नेह की झलक मिलती है। जिन महिलाओं की सास साथ नहीं रहतीं, वे खुद सरगी तैयार कर सकती हैं या परिवार की कोई बड़ी महिला उन्हें दे सकती हैं।

सरगी में ज़्यादा तला-भुना या बहुत मीठा खाने से बचें। फल, मेवे, दही और नारियल पानी बेहतर रहते हैं, क्योंकि ये दिनभर पेट और ऊर्जा को संभाले रखते हैं।

करवा चौथ की पूजा सामग्री

पूजा से पहले यह सामग्री तैयार रखें:

  • मिट्टी का करवा और ढक्कन

  • छलनी और दीपक

  • रोली, चावल, हल्दी और कुमकुम

  • सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी और मेहंदी

  • फल, मिठाई और सूखे मेवे

  • धूप, अगरबत्ती और फूल

  • करवा माता की तस्वीर और कथा की पुस्तक

करवा चौथ की पूजा विधि

  1. संकल्प: सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। मन में पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

  2. श्रृंगार: शाम को सोलह श्रृंगार करें। लाल, गुलाबी या मैरून जैसे शुभ रंग पहनना शुभ माना जाता है।

  3. पूजा स्थान: घर के मंदिर या साफ जगह पर चौकी रखें और उस पर करवा माता, शिव-पार्वती और गणेश जी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

  4. करवा तैयार करें: मिट्टी के करवे में जल भरें और उसकी टोंटी में सींक लगाएँ। उस पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ और ऊपर ढक्कन में चावल या मिठाई रखें।

  5. कथा श्रवण: शुभ मुहूर्त में सब महिलाएँ एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनें। थालियों को घुमाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

  6. आरती: कथा के बाद शिव-पार्वती और करवा माता की आरती करें।

चाँद देखने और व्रत खोलने की विधि

चंद्रोदय होने पर छत या खुली जगह से पहले छलनी में दीपक रखकर चाँद के दर्शन करें। फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें। चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें और उसकी पूजा करें। इसके बाद पति के हाथ से जल पिएँ और मिठाई का पहला निवाला खाकर व्रत खोलें। फिर बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें।

बदलता करवा चौथ

आज यह व्रत सिर्फ पत्नियों तक सीमित नहीं रहा। कई पति भी पत्नी के साथ उपवास रखते हैं, और यह रिश्ते में बराबरी की सुंदर मिसाल बन रहा है। जो महिलाएँ स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत नहीं रख सकतीं, वे फलाहार या जल के साथ व्रत रख सकती हैं। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और मधुमेह के मरीज़ों को व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए। श्रद्धा और भाव सबसे ज़रूरी हैं, कठोरता नहीं।

निष्कर्ष

करवा चौथ प्रेम, विश्वास और परंपरा का सुंदर संगम है। 29 अक्टूबर 2026 को पूरे विधि-विधान और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए व्रत करें। अपने शहर के चंद्रोदय का सही समय देखकर पहले से तैयारी रखें, ताकि शाम की पूजा बिना हड़बड़ी के हो सके। आप सभी को करवा चौथ की अग्रिम शुभकामनाएँ!