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शरद पूर्णिमा | Sharad Purnima 2022 | Kyun manayi jaati hai | Khojagiri

Sharad Purnima (शरदपूर्णिमा) - Sunday, October 9 2022

Every month of the year is divided into two halves, we call those halves which are called as Paksha.
These Pakshas are :

साल का हर महीना दो विभाग में बंटा होता है,उन विभागों को हम पक्ष कहते हैं | ये पक्ष दो प्रकार के होते हैं : 

1) कृष्ण पक्ष / Krishna Paksha -

When the Moon gradually disappears and on the 15th day when disappears completely, we call it Amavasya. Whereas this part of 15 days is called Krishna Paksha.

जब चंद्रमा धीरे-धीरे लोप होता जाता है और 15 वें दिन पूरी तरह लोप हो जाता है जिसे हम अमावस्या कहते हैं। जबकि इस 15 दिन के भाग को कृष्ण पक्ष कहते हैं।

2) शुक्ल पक्ष / Shukla Paksha -

After the second day of Amavasya, the moon begins to appear again and on the 15th day it becomes visible in full size. Which is called Poornima. Whereas part of these 15 days is called Shukla Paksha.

अमावस्या के दूसरे ही दिन से चंद्रमा फिर से दिखना शुरू होता है और 15 वें दिन पूरे आकार में दिखाई देता है। जिसे पूर्णिमा कहा जाता है। जबकि इन 15 दिनों का भाग शुक्ल पक्ष कहलाता है।

शरद पूर्णिमा क्या है? / What is Sharad Purnima?

On every new moon, the moon is not visible at all and the darkness of the night becomes darker. Whereas on a full moon the moon is visible and all the directions are illuminated with light. Fasts and festivals are observed on these 12 full moons throughout the year. But one of these major Purnima is celebrated which is called Sharad Purnima. This year Sharad Purnima is being celebrated on 09 October. Lord Lakshmi Narayan is specially worshiped on this day.

हर अमावस्या पर चाँद बिल्कुल भी दिखाई नही देता और रात का अंधेरा अधिक गहरा हो जाता है। जबकि पूर्णिमा पर चाँद पूरा दिखाई देता है और सारी दिशाएं रोशनी से उजियारी हो जाती है। साल भर की इन 12 पूर्णिमाओं पर अलग-अलग व्रत और त्यौहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख पूर्णिमा मनाई जाती है जिसे शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस वर्ष शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण का पूजन विशेष रूप से किया जाता है।

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कब मनाई जाती है शरद पूर्णिमा | When is Sharad Purnima celebrated?

शरद पूर्णिमा हर साल अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे कुमार पूर्णिमा,कोजागरी पूर्णिमा,रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि पूरे वर्ष में सिर्फ इसी दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है जिसके दर्शन से चन्द्रदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसा भी माना जाता है कि चन्द्र देव के दर्शन के वक्त उनकी चांदनी से जीव शरीर में अमरता के लक्षण आ जाते हैं और कई प्रकार के रोग ख़त्म हो जाते हैं।

Sharad Purnima is celebrated every year on the full moon day of Ashwin month. It is also known as Kumar Purnima, Kojagari Purnima, and Ras Purnima. It is said that on this day only in the whole year, the moon is full of 16 arts, whose vision gives special blessings to the moon god. It is also believed that at the time of the darshan of the moon god, due to his moonlight, the symptoms of immortality come in the body and many types of diseases are eradicated.

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खीर बनाने का महत्व / Significance of making Kheer on Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर महिलाएं शाम के वक्त खीर बनाती हैं जिसे रात भर चंद्रमा की दूधिया रोशनी में रखा जाता है और दूसरे दिन खाया जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को अमृत रस बरसता है इस वजह से पूरी रात चाँद की रोशनी में खीर रखने से उसमें अमृत रस बरसता है। जिसे खाने से स्वास्थ्य मजबूत होता है और कई बीमारियों से छुटकारा भी मिलता है। कई खीर के स्थान पर रबड़ी भी पकाई जाती है।

Keeping a fast on Sharad Purnima, women make kheer in the evening, which is kept overnight in the light of the moon and eaten on the second day. It is said that it rains nectar juice on the night of Sharad Purnima, due to this, keeping Kheer in the light of the moon throughout the night, rains nectar juice. Eating strengthens health and also gets rid of many diseases. Rabri is also cooked in place of many kheer.

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क्या है पौराणिक महत्व / What is the mythological significance -

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन कुमार कार्तिकेय का जन्म इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन को कुमार पूर्णिमा कहा जाता है। जबकि भगवान कृष्ण ने राधा जी के साथ पहला रास इसी तिथि को मनाया था इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन माँ लक्ष्मी का आविर्भाव हुआ था इसलिए इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस कारण से शरद पूर्णिमा को कौमुदी या कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं।
शरद पूर्णिमा के दिन कई स्थानों पर जागरण करने का बहुत महत्व माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की पूरी रात माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को अभय वर देती हैं। इसलिए पूरी रात जागरण करके लोग भक्ति भाव से भजन और कीर्तन के आयोजन करते हैं और भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का आवाहन करते हैं।

According to mythology, Kumar Kartikeya was born on this date, hence this day is called Kumar Purnima. Whereas Lord Krishna celebrated the first Raas with Radha ji on this date, hence it is also called Ras Purnima. Goddess Lakshmi was born on this day, so worshiping her methodically on this day is considered very auspicious. For this reason Sharad Purnima is also known as Kaumudi or Kojagar Purnima.
Jagran is considered to be of great importance at many places on the day of Sharad Purnima, it is believed that on the whole night of the full moon, Goddess Lakshmi travels the earth with Lord Vishnu and gives blessings to her devotees. That’s why after awakening the whole night, people organize Bhajans and Kirtans with devotion and invoke Lord Vishnu and Lakshmi ji.

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वैज्ञानिक कारण / Scientific Reason-

हर हिन्दू पर्व के पीछे एक वैज्ञानिक कारण जरूर होता है। शरद पूर्णिमा मनाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण यह है कि ऋषियों ने बहुत सोच समझ कर इस दिन दूध से बने खाद्यान्न, जैसे- खीर को पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखने का विधान तय किया है। क्योंकि दूध में मौजूद लैक्टिक अम्ल और चावल में स्टार्च होते हैं जो चाँद की रोशनी से मिलकर उस खीर में कुछ अलग तरह के औषधीय लक्षण पैदा करती है जिसे खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर होता है। वहीं एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात कम से कम आधा घण्टा से एक घण्टा चाँद की रोशनी लेनी चाहिए इससे श्वसन तंत्र मजबूत होता है और त्वचा रोग में आराम मिलता है। वहीं दूध से बने पकवान को चांदी के बर्तन में रात भर रखकर सुबह खाने से से रोग प्रतिरोधकता बढ़ती है और शरीर के विषैले तत्व खत्म हो जाते है।

There is definitely a scientific reason behind every Hindu festival. The scientific reason behind celebrating Sharad Purnima is that the sages have very thoughtfully decided to keep food grains made of milk, such as kheer, under the open sky for the whole night on this day. Because there are lactic acid present in milk and starch in rice, which together with the light of the moon produces some different medicinal symptoms in that kheer, eating it increases immunity and has a positive effect on health. At the same time, according to a scientific research, at least half an hour to one hour of moonlight should be taken on the night of Sharad Purnima, it strengthens the respiratory system and provides relief from skin diseases. On the other hand, keeping a dish made of milk in a silver vessel overnight and eating it in the morning increases immunity and eliminates the toxic elements of the body.

शरद पूर्णिमा पूजा विधि / Puja Vidhi -

शरद पूर्णिमा के दिन दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए, फिर मन में संकल्प लेकर लक्ष्मी नारायण का उपवास रखना चाहिए,पूजा घर या मंदिर में जाकर माँ लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए और पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद गौरी गणेश का आवाहन करके उनकी स्तुति करनी चाहिए। इसी तरह लक्ष्मी नारायण का भी आवाहन करके पूरे श्रद्धा भाव से चंदन,कुमकुम,अक्षत,पुष्प,फल,पान,दक्षिणा,नैवेद्य,धूप,दीप से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद हाथ पुष्प और अक्षत लेकर कथा सुननी चाहिए। इस दिन खोवा और खीर बनाकर भोग लगाना चाहिए। इसके बाद लक्ष्मीजी और विष्णु जी के 108 नामों से हवन करनी चाहिए। फिर उनकी आरती करके प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

On the day of Sharad Purnima, one should take bath after retiring from daily activities, then take a resolution in the mind and fast for Lakshmi Narayan, go to the worship house or temple and worship Goddess Lakshmi and Vishnu and take a vow of worship. After this, Gauri Ganesh should be invoked and praised. Similarly, Lakshmi Narayan should be invoked and worshiped with full devotion with sandalwood, kumkum, akshat, flowers, fruits, paan, dakshina, naivedya, incense, lamp. After this, the story should be heard by taking flowers and Akshat in hand. On this day, Khova and Kheer should be made and offered. After this, Havan should be done with 108 names of Lakshmi and Vishnu. Then after performing their aarti, prasad should be accepted.

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